हिंदी भाषा
स्ंसार में सम्पर्क के लिए भाषा की आवश्यकता होती है। मानव और जानवर को मूल भिन्नता यह है कि मानव के पास अपने भाव और विचारों को व्यक्त करने के लिए ‘भाषा’ है, जबकि जानवर भाषा की इस शक्ति से वंचित है। विश्व के भाषा परिवारों में भारोपीय परिवार सर्वप्रमुख है क्योंकि इसी वर्ग की एक प्रमुख भाषा हिन्दी है। अतएव भाषा की व्यवस्था के नियमों को जानने के लिए और वाक्यों को शुद्ध बोलने और लिखने के लिए व्याकरण की आवश्यकता होती है। हम कह सकते हैं कि व्याकरण भाषा के स्वरूप की विस्तृत जानकारी देता है। व्याकरण का ज्ञान ही मनुष्य को भाषा सही रूप से बोलने, लिखने और समझने की जानकारी देता है।
व्याकरण सामान्य रूप से चार भागों में विभक्त हैं-
1.वर्ण विचार 2. शब्द विचार 3. पद विचार 4. वाक्य विचार
(1) वर्ण विचारः इसके अन्तर्गत वर्णों के आकार, भेद, उच्चारण और उनको मिलाने की विधि बतायी जाती है।
(2) शब्द विचारः इसमें शब्दों के भेद, रूप एवं व्युत्पत्ति का वर्णन किया जाता है।
(3) पद विचारः पद तथा उसके भेदों का वर्णन किया जाता है।
(4) वाक्य विचारः वाक्यों में भेद, वाक्य निर्मित एवं वाक्य विच्छेद करने की विधि तथा विराम चिहृों का वर्णन किया जाता है।
