दादरा और नागर हवेली तथा दमन और दीव विलय
Ø दादरा और नागर हवेली
तथा दमन और दीव का विलय करके एक केंद्र शासित प्रदेश बनाने हेतु दादरा नागर हवेली
और दमन-दीव (केंद्र शासित प्रदेशों का विलय) विधेयक, 2019 संसद द्वारा 3 दिसंबर,
2019 को पारित किया गया, जो 26 जनवरी, 2020 को एक केंद्र शासित प्रदेश बन जाएगा।
Ø सरकार की न्यूनतम
सरकार, अधिकतम शासन नीति के मद्देनजर दोनों केंद्रशासित प्रदेंशों की छोटी आबादी
और सीमित भौगोलिक क्षेत्र को देखते हुए, बेहतर प्रशासन प्रबंधन हेतु केंद्र शासित
प्रदेंशों का विलय करने का निर्णय लिया गया।
Ø विलय किए गए केंद्र
शासित प्रदेश का नाम दादरा और नागर हवेली तथा दमन और दीव होगा।
Ø अब केंद्र शासित
प्रदेशों की संख्या 9 से घटकर 8 हो जाएगी।
Ø
केंद्रीय गृह राज्य
मंत्री किशन रेड्डी ने 26 नवंबर,2019 को इस विधेयक को लोक सभा में पेश किया।
Ø
संविधान की पहली
अनुसूची विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेंशों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों
को निर्दिष्ट करती है। विधेयक दो केंद्र शासित प्रदेशों के विलय के लिए पहली
अनुसूची में संशोधन करता है।
Ø
संविधान के अनुच्छेद
240 (1) में राष्ट्रपति कों कुछ केंद्र शासित प्रदेंशों के लिए नियम बनाने की
अनुमति है। विधेयक दादरा और नागर हवेली तथा दमन और दीव केंद्र शासित प्रदेंशों के
स्थान पर एक केंद्र शासित प्रदेश बनाने के लिए इस अनुच्छेद में संशोधन करता है।
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जन प्रतिनिधित्व
अधिनियम, 1950 की पहली अनुसूची में दोनों केंद्र शासित प्रदेंशों में एक-एक लोकसभा
सीट का प्रावधान है। विधेयक विलय होने वाले केंद्र शासित प्रदेशों में दो लोकसभा
सीटों के आबंटन के लिए इस अनुसूची में संशोधन करता है।
Ø
विधेयक में प्रावधन
है कि विलय होने वाला केंद्र शासित प्रदेश मुंबई उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार
में आएगा।
Ø
मौजूदा केंद्र शासित
प्रदेशों से संबधित कार्यों में सेवारत व्यक्ति विलय होने वाले केंद्र शासित
प्रदेश के लिए अस्थायी रूप से कार्य करेंगे।
Ø
दो केंद्र शासित
प्रदेश पश्चिमी क्षेत्र में स्थित हैं, और लंबे समय तक पुर्तगाली शासन के अधीन थे।
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दादरा और नागर हवेली
के लोगों ने स्वयं को पुर्तगाली शासकों से 2 अगस्त, 1854 को स्वतंत्र घोषित किया
तथा इसे 1954 से 1961 के बीच स्वतंत्र दादरा और नागर हवेली की वरिष्ठ पंचायत नामक
नागिरक परिषद द्वारा प्रशासित किया गया, जिसने 1961 में भारत के साथ विलय को सहमति
प्रदान की।
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दमन और दीव को
दिसंबर 1961 में पुर्तगाली शासन से आजादी मिली। 1961 से 1987 तक दमन और दीव, गोवा,
दमन और दीव केंद्र शासित प्रदेश का हिस्सा था। 1987 में गोवा को राज्य का दर्जा
मिला, तो दमन और दीव को एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया।
