यूरोपीय कंपनियों का आगमन


यूरोपीय कम्पनियों का आगमन



यूरोपीय कम्पनियों का आगमन

  •   15 वीं शताब्दी में एशिया और भूमध्य सागरीय व यूरोपीय व्यापार का एकाधिकार किस देश के व्यापारियों के हाथों मे था – अरब और इतावली व्यापारियों के हाथों में था।
  •   पुर्तगाल के किस शासक ने मसाले के व्यापार पर नियंत्रण स्थापित करने की इच्छा से भारत के लिऐ सीधे समुद्री मार्ग के खोज की आज्ञा प्रदान की – डान हेनरीक ( हेनरी द नेविगेटर)
  •   ‘संभवत: मध्ययुग की किसी भी अन्य घटना का सभ्य संसार पर इतना प्रभाव नहीं पड़ा, जितना कि भारत जाने के समुद्री मार्ग खुल जाने से ’’ उक्त कथन किस इतिहासकार का है- डाडवेल का
  •   मध्यकाल में सर्वप्रथम भारत से व्यापार सम्बन्ध किस यूरोपियन कम्पनी व देश ने बनाये थें-पुर्तगाली
  •  15वीं शताब्दी में हिन्द महासागर के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटना, किस बन्दरगाह का अन्तर्राष्टीय बन्दरगाह के रूप में उभरना था- मलक्का बन्दरगाह का
  •   किस भारतीय व्यापारी ने वास्कोडिगामा का सहयोग किया था- अब्दुल मजीद
  •   भारत में विदेशी मुख्यतः दो भागो से प्रवेश कर सकते थे 1) स्थल मार्ग 2) जल मार्ग
  •   1453 में उस्मानिया सल्तनत (तुर्क) ने कुस्तुनिया जीत लिया और धीरे-धीरे सम्पूर्ण दक्षिण-   पश्चिम एशिया और दक्षिण-पूर्वी यूरोप पर अधिकार कर लिया।
  •   यूरोप गर्म–मसालों के लिए दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों पर निर्भर था।
  •   ‘‘ भारत एक ऐसा देश था जो धनवान था और जहाँ से वे गर्म-मसाले भी प्राप्त कर सकते थे।’’
  •  कोलम्बस स्पेन से भारत के लिए समुद्री-मार्ग खोजने चला था किन्तु 1492 में अमरीका पहुँच गया। इस प्रकार अमरीका की खोज हुई।
  •   बार्थोलोम्यू डियास 1487 में ‘ आशा अन्तरीप’ (अफ्रीका का अन्तिम किनारा), जिसे Cape of Good Hope कहा और वहाँ पहुँच गया।
  •   उसके 10 वर्ष बाद 1947 में पुर्तगली कैप्टन ‘वास्कोडिगामा’ पुर्तगाल से चलकर इसी आशा   अन्तरीप पहुँचा। जिसे उत्तमाशा अन्तरीप भी कहते है।
  •   अब्दुल मजीद नामक गुजराती की सहायता से 20 मई 1498 को वास्कोडिगामा भारत के   पश्चिमी तट स्थित बन्दरगाह ‘कालीकट’ पहुँच गया।
  •  वास्कोडिगामा ने एक नया समुद्री मार्ग खोजा जिसे ‘ Cape of Good Hope Route नाम दिया गया।
  •   किस पुर्तगाली वायसराय की समाधि कोचीन में हैं? – वास्को-डी-गामा
  •   किस पुर्तगाली शासक ने 15वीं शताब्दी में समुद्री यात्राओं को सम्भव बनाने के लिए दिक् सूचक (Mariner’s Compass) तथा नक्षत्र यंत्र का आविष्कार एवं का उपयोग करवाया?- डॉन हेनरीक ने
  •   पश्चिम वंगाल की हुगली नामक फैक्ट्री की स्थापना किस यूरोपीय शाक्ति द्वारा की गई थी?- पुर्तगाली
  •   पांडिचेरी (वर्तमान पुदुच्चेरि) पर कब्जी करने वाली पहली यूरोपीय शक्ति कौन थी?- पुर्तगाली (दूसरी डच, तीसरी 1793 में अंग्रेज और 1814 में पेरिस संधि) के बाद पांडिचेरी पर फ्रांस का अधिकार हुआ।
  •   हुगली को बंगाल की खाड़ी में समुद्री लूटपाट के लिए किसने अड्डा बनाया था? – पुर्तगाली ने (इसी कारण 1632 में मुगल बादशाह शाहजहाँ ने हुगली में पुर्तगाली बस्तियों को नष्ट कर दिया था।)
  •   पुर्तगाली दूत अन्तानियों कैब्राल किसके शासन काल में भारत आया था? – अकबर के
  •  स्पाइस आइलैण्ड (मसाली द्वीप) उपमा, पश्चिमी यूरोपीय देश एवं व्यापारी किस देश को प्रदान किये थे? – इण्डोनेशिया को इसे ‘ईस्ट इंडीज’ के नाम से भी जाना जाता था।
  •  अफीम, सिल्क, मसाले एवं नील में से प्रारम्भ में यूरोपीय व्यापारियों की रूचि किसमें थी? – मसालों में
  •   15वीं शताब्दी के लगभग बंगाल की खाड़ी के समूचे क्षेत्र में और विशेष रूप से कोरोमण्डल से मलक्का तक के व्यापार को नियंत्रित करने वाला प्रमुख भारतीय समुदाय कौन था? – चेट्टियार समुदाय (उनके साथ एक अन्य दक्षिणी-पूर्वीं, व्यापारी समुदाय ‘चूलिया मुसलमान’) थे।
  •   भारत में पुर्तगाली सामुद्रिक साम्राज्य को कौन-सी उपमा दी जाती हैं?- एस्तादो द इण्डिया
  •   भारत में सबसे पहले और सबसे अन्त में आने और जाने वाली यूरोपीय शक्ति कौन-सी थी?- पुर्तगाली सबसे पहले 1498 में आए और सबसे अन्त में 1961 में गये।
  •   कालीकट का मलयाली नाम क्या हैं? – कोषिक्कोड
  •   होर्मुज बन्दरगाह पर किस पुर्तगाल गवर्नर के समय कब्जा हुआ था? – अलफांसो डी अलबुकर्क
  •  भारत में यूरोपीय शक्ति द्वारा अपना पहला किला कहाँ निर्मित किया गया था? – कोचीन (केरल)
  •  पुर्तगालियों ने कब गोवा जीता और होर्मुज खो दिया?- क्रमशः 1510 ई. एवं 1622 ई.
  •   बंगाल का कौन-सा बन्दरगाह पुर्तगलियों के समय पोर्टोग्राण्डे की संज्ञा से अभिहित किया जाता था?- चटगाँव
  • 1542 ई. में नये पुर्तगाली गवर्नर ‘मार्टिन ए-फॉन्सो डे सोयुमा के साथ सेंट फांसिस जेवियर भी दक्षिण भारत आये थे।
  •   1572ई. में पुर्तगाली गवर्नर बनने वाले ‘एंटानिओ द नोरोन्हा’ के समय अकबर कैम्बे गया था, जहाँ पुर्तगालियों से उसका पहली बार परिचय हुआ। फलतः 1580 ई. में ‘जेसुइट मिशन’ अकबर के दरबार में आया। इनमें फादर एकाबिवा ब मान्सरेट शामिल थे।
  • अकबर की अनुमति से हुगली में तथा शाहजहाँ की अनुमति से बंदेल में पुर्तगालियों ने कारखाने स्थापित किये।
  •   पुर्तगालियों के विरूद्ध शाहजहाँ ने किस नगर को घेरा था?- हुगली को
  •   अल्फांसो-डी-अल्बुकर्क की मजार भारत में कहाँ स्थित हैं? – गोण्डा में
  •  भारत के साथ व्यापार के लिए सर्वप्रथम संयुक्त पूंजी कम्पनी किस यूरोपीय शक्ति ने आरम्भ की?- डचों ने (1602 ई.)
  •   डचों ने पुर्तगालियों को पराजित कर आधुनिक कोच्चि में किस फोर्ट का निर्माण किया था?- फोर्ट विलियम्स का 1663 में (1814 में कोच्चि ब्रिटिश उपनिवेश बन गया।)
  •  किस युद्ध के द्वारा डचों का भारत से अन्तिम रूप से पतन हो गया?- बेदरायुद्ध (1759 ई. में डचों एवं अंग्रेजों के मध्य)
  •   प्रथम डट फैक्ट्री की स्थापना भारत में किसने, कब और कहाँ की थी? – वॉदेंरहगें ने 1605 में मसूलीपट्टम (आन्ध्र प्रदेश) में की थी
  •   यूरोपीय व्यापारियों में भारतीय वस्त्र को प्रमुख निर्यात की वस्तु बनाने का श्रेय किसे प्राप्त है? – डचों को

भारत में डचों द्वारा स्थापित फैक्ट्रियां

      फैक्ट्रियाँ (कोठी)                     वर्तमान स्थिति           स्थापना वर्ष

      मसूलीपट्टम                    आन्ध्र प्रदेश                   1605(वॉन्देरहनें)

      पुलीकट(फोर्ट गेल्ड्रिया)            तमिलनाडू                     1610

      सूरत                          गुजरात                       1616

      विमलीपट्टम                   आन्ध्र प्रदेश                    1641

      कराईकल                      तमिलनाडू                      1645

      चिनसुरा                       बंगाल                         1653

      कासिम बाजार                  बंगाल                         1658

      पटना                         बिहार                          1658

      बालासोर                       उड़ीसा                         1658

      नागपट्टिनम                   तमिलनाडू                      1659

      कोचीन                         केरल                         1663

  •   पोर्टोनोवो एक समृद्ध कपड़ा उत्पादन केन्द्र था।
  • मसूलीपट्टनम और सूरत से डचों द्वारा नील निर्यात किया जाता था।
  •   डचों द्वारा भड़ौच बन्दरगाह से कपड़े का निर्यात किया जाता था।
  •   पुलीकट में डच अपने स्वर्ण पैगोड़ा (सिक्के) ढालते थे।
  •   नागलवांचे और पालकोल्लू नील के उत्पादन और कपड़े की रंगाई के लिए प्रसिद्ध केन्द्र थे।
  •   मद्रास के दक्षिण में स्थित सदरमत्तम उत्कृष्ट प्रकार के कपड़ो के लिए प्रसिद्ध था।
  •   बंगाल से डचों द्वारा निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में- सूती कपड़ा, रेशम, अफीम तथा शोरा थी
  •   भारत से डचों द्वारा निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में- नील,शोरा, मसाले, कच्चा रेशम, शीशा व अफीम आदि थे।
  •   डचों द्वारा कोरोमण्डल के बन्दरगाहों से बैंटम और बटेबिया को विशेष प्रकार के बुने हुए वस्त्र निर्यात किए जाते थे।
  •   भारत से अफीम, जावा और चीन में निर्यात किया जाता था।
  •   डच व्यापारिक व्यवस्था सहकारिता अर्थात् कार्टल पर आधारित थी।
  •   डच फैक्ट्रियों के प्रमुखों को फैक्टर कहा जाता था।
  •   200 वर्षों के काल में डच कम्पनी ने अपने साझेदारों को औसतन 18 प्रतिशत का लाभांश दिया, जो वाणिज्यिक इतिहास में सर्वाधिक है।
  •   डच कम्पनी के निदेशकों को भद्रजन XVII कहा जाता था।



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