हिन्दी व्याकरण

हिन्दी व्याकरण



  1. व्याकरण का अर्थ-
    व्याकृत या विश्लेषण करने वाला शास्त्र। व्याकरण वह शास्त्र है, जो किसी भाषा के स्वरूप को स्पष्ट करता है तथा उसे शुद्ध उच्चारित करने, लिखने और समझने की विधि को बतलाता है।
  2. हिन्दी व्याकरण ग्रन्थों के लेखन का इतिहास बहुत पुराना है। प्रारम्भ में लिखे गए हिन्दी व्याकरण ग्रन्थों का मूल उद्देश्य विदेशियों को हिन्दी ज्ञान कराना था इसलिए प्रारम्भिक व्याकरण विदेशी विद्वानों द्वारा लिखे गए। इसके बारे में पहला प्रयास जे. जे. केटलर ने 1768 ई. में ‘हिन्दुस्तानी ग्रामर’ पुस्तक लिखकर किया। इस ग्रन्थ को ही हिन्दी का पहला व्याकरण माना जाता है। बाद में जॉन गिलक्रिस्ट ने 1790 ई. में A Grammar of Hindi Language नामक पुस्तक हिन्दी व्याकरण पर लिखी।
  3. कामता प्रसाद गुरू का 1921 ई. में ‘हिन्दी व्याकरण’ नामक ग्रंथ प्रकाशित हुआ। इसी प्रक्रम को आगे बढ़ाते हुए पण्डित किशोरीदास वाजपेयी का लिखा गया ग्रन्थ ‘हिन्दी शब्दानुशासन’ 1958 ई. में प्रकाशित हुआ जिसे हिन्दी व्याकरण ग्रन्थों में मील का पत्थर (सर्वश्रेष्ठ ग्रन्थ) माना गया है। डॉ हरदेव बाहरी ने 1980 में ‘व्यावहारिक हिन्दी व्याकरण’ तथा डॉ वासुदेव नन्दन प्रसाद ने भी ‘आधुनिक हिन्दी व्याकरण और रचना’ नामक व्याकरण ग्रन्थ लिखकर इस दिशा में अत्यन्त अदुभुत काम किया है।
  4. व्याकरण द्वारा भाषा का परिष्कार किया जाता है। व्याकरण वस्तुतः भाषा के अधीन होता है और भाषा के अनुसार परिवर्तित होता रहता है। दूसरे शब्दों में व्याकरण भाषा की मर्यादा का उल्लंघन करने से रोकता है।
  5. हिन्दी व्याकरण के अन्तर्गत हम प्रायः पाँच प्रकार के शब्दों पर विचार करते हैं-
  6.  1.संज्ञा, 2. सर्वनाम, 3. विशेषण, 4.क्रिया, 5.अव्यय। 
  7. इनमें से प्रथम चार ‘विकारी’ शब्द कहे जाते हैं, वे शब्द जिनके रूप में आवश्यकतानुसार बदलते हैं। उन्हें विकारी शब्द कहते है। जैसे- लड़का
  8. अविकारी शब्द उन शब्दो को कहते हैं, जिनके रूप में परिवर्तन नहीं होता है। उन्हें अविकारी शब्द कहते है। जैसे – ‘इधर’ 
  9. राम ने इधर देखा।              सीता ने इधर देखा।

    लड़के ने इधर देखा।             लड़कों ने इधर देखा।

     

    संज्ञा

    किसी प्राणी, वस्तु, स्थान या भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं। जैसे- राम, आगरा, चिडिया, कुर्सी, गंगा, खुशी आदि संज्ञा शब्द हैं।

    संज्ञा के भेद- संज्ञा पाँच प्रकार की होती है

    1.     व्यक्तिवाचक संज्ञा

    2.     जातिवाचक संज्ञा

    3.     भाववाचक संज्ञा

    4.     समूहवाचक संज्ञा

    5.     द्रव्यवाचक संज्ञा

    1.     व्यक्तिवाचक संज्ञा- जो संज्ञा शब्द किसी एक व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध कराते हैं, वे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहलाते हैं। जैसे- राधा, गोदावरी, दिल्ली, हिमालय

    2.     जातिवाचक संज्ञा- जो संज्ञा शब्द किसी एक प्रकार की सभी वस्तुओं को बोध कराते हैं, वे जातिवाचक संज्ञा कहलाते हैं। जैसे- लड़की, नदी, पर्वत, नगर। लड़की – (सभी लड़कियो को बोध) नदी- (सभी नदियों का बोध)

    3.     भाववाचक संज्ञा- जो संज्ञा शब्द किसी भाव, गुण, दशा आदि का बोध कराते हैं, वे इस वर्ग में आते हैं। जैसे- प्रेम, कटुता, मिठास, क्रोध, बचपन, मधुरता

    4.     समूहवाचक संज्ञा- जिस संज्ञा शब्द से किसी व्यक्ति समूह या वस्तु का बोध हो, उसे समूहवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे- सभा, दल, गिरोह, मण्डल, गुच्छा

    5.     द्रव्यवाचक संज्ञा- जिस संज्ञा से किसी द्रव्य या नाप-तौल वाली वस्तु का बोध हो, उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे- पानी, दूध, सोना, लोहा, तेल

     

    भाववाचक संज्ञा बनाना- संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, अव्यय, शब्दों में प्रत्यय लगाकर उन्हें भाववाचक संज्ञा बनाया जा सकता हैं। जैसे-

    पुरूष ( जातिवाचक संज्ञा)         पुरूषत्तव (भाववाचक संज्ञा)

    नारी ( जातिवाचक संज्ञा)         नारीत्व (भाववाचक संज्ञा)

    अपना (सर्वनाम)                अपनत्व (भाववाचक संज्ञा)

    मधुर (विशेषण)                 मधुरता (भाववाचक संज्ञा)

    बच्चा (जातिवाचक संज्ञा)         बचपन (भाववाचक संज्ञा)

    वीर (विशेषण)                  वीरता (भाववाचक संज्ञा)

    बूढ़ा (जातिवाचक संज्ञा)          बुढ़ापा (भाववाचक संज्ञा)

    चढ़ना (क्रिया)                  चढ़ाई (भाववाचक संज्ञा)

    पढ़ना (क्रिया)                  पढ़ाई (भाववाचक संज्ञा)

    निकट (अव्यय)                 निकटता (भाववाचक संज्ञा)

    समीप (अव्यय)                 समीपता (भाववाचक संज्ञा)

                           लिंग

लिंग का तात्पर्य है- चिन्ह। शब्द के जिस रूप से यह पता चलता है कि वह पुरूष जाति का है या स्त्री जाति का उसे लिंग कहते हैं। हिन्दी में दो लिंग हैं- पुल्लिंग,स्त्रीलिंग, तथा संस्कृत में तीन लिंग थे- पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग किन्तु संस्कृत के नपुंसकलिंग शब्द हिन्दी में या तो पुल्लिंग माने गए या स्त्रीलिंग माने गये है।

हिन्दी में लिंग के दो आधार होते है-

(1)             रूप के आधार पर,

(2)             प्रयोग के आधार पर

(1)             ऱूप के आधार पर लिंग निर्णय- रूप के आधार पर लिंग निर्णय करने का तात्पर्य है- शब्द की व्याकरणिक संरचना विशेषतः उसमें प्रयुक्त प्रत्यय तथा शब्दान्त में आए स्वर के आधार पर लिंग निर्णय करना होता है। रूप के आधार पर लिंग निर्णय के कुछ नियम बनाये गए है-

पुल्लिंग शब्द- अकारान्त, आकारान्त शब्द प्रायः पुल्लिंग होते है। जैसे- राम प्रेम,सागर, कपड़ा , चीता

अपवाद- बात, घात, लात, रमा, वीरता (ये सभी शब्द स्त्रीलिंग हैं)

(अ)- वे भाववाचक संज्ञाएँ जिनके अन्त में त्व, य, व पाया जाता है, प्रायः पुल्लिंग होती हैं। जैसे- पुरूषत्व, धैर्य, गौरव।

(ब)- वे शब्द जिनके अन्त में पा, पन, आव, आवा, खाना आदि प्रत्यय जुड़े होते हैं प्रायः पुल्लिंग होते हैं। जैसे- बुढ़ापा, बचपन, लड़कपन, चढ़ावा, दीवानखाना।

स्त्रीलिंग शब्द- इकारान्त शब्द स्त्रीलिंग होते हैं। जैसे- तिथि, रीति, राशि, जाति, हानि, ।

अपवाद- कवि, कपि, रवि, पति शब्द पुल्लिंग हैं।

(अ)           ईकारान्त शब्द प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं। जैसे- रोटी, छोटी, चाची, रानी , टोपी , दासी शब्द पुल्लिंग है।

(ब)- आई, इया, ता आवट, इमा आदि प्रत्ययों से बने शब्द प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं। जैसे- पढ़ाई, डिबिया, चिड़िया, एकता, मिलावट, लिखावट, महिमा, गरिमा आदि।

(2) प्रयोग के आधार पर लिंग – कोई शब्द स्त्रीलिंग है या पुल्लिंग इसे ज्ञात करने के लिए शब्द के साथ विशेषण, कारक चिन्ह अथवा क्रिया को आधार बनाया जा सकता है। जैसे

(1) विशेषण का प्रयोग करके लिंग निर्धारण-

पुस्तक अच्छी है।      (पुस्तक स्त्रीलिंग है)

ग्रंथ अच्छा है।        (ग्रंथ पुल्लिंग है)

(2)             कारक चिन्ह ‘का, की’ का प्रयोग करके-

राम की पुस्तक   (स्त्रीलिंग)

राम का ग्रन्थ    (पुल्लिंग)

(3)             क्रिया के प्रयोग से-

पुस्तक खो गयी  (स्त्रीलिंग)

ग्रन्थ खो गया    (स्त्रीलिंग)

     स्त्रीलिंग प्रत्यय- वे प्रत्यय जो पुल्लिंग में जुड़कर उसे स्त्रीलिंग बना दें, स्त्रीलिंग प्रत्यय या ‘स्त्री प्रत्यय’ कहे जाते है।

पुल्लिंग शब्द         स्त्री प्रत्यय           स्त्रीलिंग शब्द

भला, बड़ा, चाचा                        भली, बड़ी, चाची

योगी, कमल           इनी               योगिनी, कमलिनी

धोबी, माली            इन               धोबिन, मालिन

मोर, चोर              नौ               मोरनी, चोरनी

जेठ, पंडित           आनी               जेठानी, पंडितानी

ठाकुर, पंडित         आइन               ठकुराइन, पंडिताइन

डिब्बा, बेटा           इया               डिबिया, बिटिया

युग्म शब्दों का लिंग निर्णय- युग्म शब्द का निर्णय अन्तिम शब्द के लिंग के आधार पर किया जाता है। अर्थात् यदि अन्तिम शब्द पुल्लिंग है तो पूरा शब्द पुल्लिंग होगा यदि अन्तिम शब्द स्त्रीलिंग है तो पूरा शब्द स्त्रीलिंग होगा-

मैनें धोती-कुर्ता पहना।            (पुल्लिंग)

मैंने कुर्ता-धोती पहनी।            (स्त्रीलिंग)

मैंने दाल-भात खाया।            (पुल्लिंग)

मैंने दही-रोटी खायी।             (स्त्रीलिंग)

उभयलिंगी शब्द-   1 हार- माला उन्होंने हार पहनाया। (पुल्लिंग)

                       पराजय उनकी हार हो गई। (स्त्रीलिंग)

2. कल- आगामी दिन कल कभी नहीं आता। (पुल्लिंग)

       मशीन कारखाने की कल खराब हो गई। (स्त्रीलिंग)

3. विधि- विधाता विधि बड़ा बलशाली है। (पुल्लिंग)

        तरीका किस विधि से बनी है।  (स्त्रीलिंग)

वाक्य में लिंग सम्बन्धी अशुद्धियाँ और निराकरण-

आपकी महान कृपा है।       (अशुद्ध)

आपकी महती कृपा है।       (शुद्ध)

महादेवी जी विद्वान महिला हैं। (अशुद्ध)

महादेवी जी विदुषी महिला हैं। (शुद्ध)

मीराबाई कृष्ण भक्ति कवि थीं। (अशुद्ध)

मीरबाई कृष्ण भक्त कवयित्री थीं। (शुद्ध)

पूजनीय माताजी को प्रणाम।  (अशुद्ध)

पूजनीया माताजी को प्रणाम।  (शुद्ध)

वह साधु स्त्री है।            (अशुद्ध)

वह साध्वी स्त्री है।          (शुद्ध)

रानी लक्ष्मीबाई वीर थीं।      (अशुद्ध)

रानी लक्ष्मीबाई वीरांगना थीं। (शुद्ध)

दही खट्टा है।             (शुद्ध)

तौलिया सूख रही है।        (शुद्ध)

मोहन गया।               (पुल्लिंग)

सीता गयी।               (स्त्रीलिंग)

राम ने फल खाया।         (पुल्लिंग)

राम ने रोटी खायी।              (स्त्रीलिंग)

सीता ने फल खाया।        (पुल्लिंग)

सीता ने रोटी खायी ।       (स्त्रीलिंग)

लिंग सम्बन्धी अशुद्धियों का निराकरण-

वहाँ भगदड़ मच गया।  (अशुद्ध)

वहाँ भगदड़ मच गयी। (शुद्ध)

वह लड़की बुद्धिमान है।  (अशुद्ध)

यह लड़की बुद्धिमती है।  (शुद्ध)

पुत्री पराया धन होता है। (अशुद्ध)

पुत्री पराया धन होती है। (शुद्ध)

इस कुएँ का पानी खारी है। (अशुद्ध)

इस कुएँ का पानी खारा है। (शुद्ध)

दही बहुत खट्टी हो गई।   (अशुद्ध)

दही बहुत खट्टा हो गया।  (शुद्ध)

पूजनीय माताजी कल आएंगी। (अशुद्ध)

पूजनीया माताजी कल आएंगी। (शुद्ध)


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