हिन्दी व्याकरण (भाग-2) वचन, कारक




    वचन

    विकारी शब्दों के जिस रूप से उनकी संख्या एक या अनेक का बोध होता है, उसे वचन कहते हैं।

    संस्कृत भाषा में तीन वचन हैं- एकवचन, द्विवचन और बहुवचन किन्तु पालि भाषा में हि द्विवचन समाप्त हो गया है और केवल दो वचन रह गए- एकवचन और बहुवचन।

    एकवचन- शब्द के जिस रूप से यह बोध होता है कि वस्तु एक है उसे एकवचन कहा जाता है। जैसे- लड़का, घोड़ा, पुस्तक, नगर, नदी,।

    बहुवचन- शब्द के जिस रूप से यह बोध होता है कि वस्तु एक से अधिक है, उसे बहुवचन कहते हैं। जैसे- लड़को, घोड़े, पुस्तके, पुरूषो आदि।

    बहुवचन प्रत्यय- (1) वे प्रत्यय जो एकवचन शब्द में जुड़कर उसे बहुवचन बना देते हैं, बहुवचन प्रत्यय कहलाते हैं।

    प्रत्यय           एकवचन शब्द             बहुवचन शब्द

                      लड़का                   लड़के

    एँ                  सड़क                   सड़कें

    याँ                 नदी                     नदियाँ

    ओं                 साधु                    साधुओं

    (2)- कभी-कभी कुछ शब्द भी किसी शब्द को बहुवचन बनाने के लिए जोड़े जाते हैं। जैसे-

     शब्द             एकवचन                   बहुवचन

     वृन्द               मुनि                     मुनिवृन्द

     गण               कृषक                    कृषकगण

     जन               युवा                      युवजन   

     वर्ग                छात्र                      छात्रजन

     लोग               नेता                      नेता लोग

    नित्य बहुवचन शब्द- हिन्दी के कुछ शब्द नित्य बहुवचन हैं, अर्थात् उनका प्रयोग सदैव बहुवचन में होता है। जैसे-

     दर्शन – मैंने दर्शन कर लिए।

     प्राण – शेर को देखकर प्राण निकल गए।

     आँसू – आँखों के आँसू निकलने लगे।

     होश – मेरे होश उड़ गए।

     बाल – मैंने कल बाल कटा लिए।

     हस्ताक्षर – आपने हस्ताक्षर कर दिए।

    नित्य एकवचन शब्द- हिन्दी के कुछ शब्द ऐसे भी है जिनका प्रयोग सदैव एकवचन में होता है। जैसे-

    सामान- सारा सामान समाप्त हो गया।

    जनता – जनता सब याद रखती है।

    माल – माल लुट गया।

    सामग्री – हवन सामग्री लानी है।

    चाँदी – चाँदी महँगी हो गई।

    सोना – सोना महँगा हो गया।

    पानी – पानी फैल गया।

    वचन सम्बन्धी नियम- (1) पानी, तेल, दूध, सोना, चाँदी आदि प्रदार्थ सूचक शब्द सदैव एकवचन में प्रयुक्त होते हैं।

    (2)- ‘अनेक’ शब्द ‘एक’ का बहुवचन है अतः अनेकों का प्रयोग अशुद्ध है। जैसे-

         मेले में अनेकों लोग थे। (अशुद्ध)

         मेले में अनेक लोग थे। (शुद्ध)

    (3)- विभक्ति रहित कर्ता होने पर वाक्य की क्रिया कर्ता के अनुसार वचन वाली होगी। जैसे-

         राम घर गया   (पुल्लिंग एकवचन)

         राधा घर गयी   (स्त्रीलिंग एकवचन)

         लड़के घर गये   (पुल्लिंग बहुवचन)

    (4)- यदि कर्ता और कर्म दोनों विभक्ति चिन्ह से युक्त हों तो क्रिया पुल्लिंग एकवचन होगी। जैसे-      राधा ने मोहन को पीटा

         लीना ने लड़कों को पीटा

         तुमने वहाँ किसको देखा

    (5)- एकवचन कर्ता के साथ बहुवचन सूचक पदार्थों का प्रयोग नहीं होता । जैसे-

         बंदर पेड़ों पर बैठा था। (अशुद्ध)

         बंदर पेड़ पर बैठा था।  (शुद्ध)

    (6)- प्रत्येक, हरेक का प्रयोग एकवचन में होता है। जैसे-

         हरेक आदमी लालची नहीं होता।

         प्रत्येक व्यक्ति को आना चाहिए।

    (7)- एक ही लिंग वचन की अनेक संज्ञाएँ विभक्ति रहित कर्म बनकर वाक्य में प्रयुक्त हों तो क्रिया उन्हीं वाली और बहुवचन में होगी। जैसे-

         मैंने जंगल में शेर, चीते, हिरन और सांभर देखे।

         उसने जंगल में भेड़, बकरी, लोमड़ी और शेरनी देखी।

    (8)- आदर सूचक शब्द यदि वाक्य में है तो एकवचन कर्ता के साथ भी बहुवचन क्रिया का प्रयोग होगा। जैसे-

         तुलसीदास जी अच्छा कवि था। (अशुद्ध)

         तुलसीदास जी अच्छे कवि थे।  (शुद्ध)

    वचन सम्बन्धी अशुद्धियों का निराकरण-

        अशुद्ध वाक्य                              शुद्ध वाक्य

        वहाँ अनेकों लोग आए थे।                   वहाँ अनेक लोग आए थे।

         आप अच्छा आदमी है।                     आप अच्छे आदमी हैं।

         ये आकाशवाणी है।                        यह आकाशवाणी है।

         आप लोग अपनी राय दें।                  आप लोग अपनी अपनी राय दें।

         मैंने चार पूड़ी खायीं।                       मैंने चार पूड़ियाँ खायीं।

         वृक्षों पर मोर बैठा है।                      वृक्ष पर मोर बैठा है।

         इस समय सात बजा है।                    इस समय सात बजे है।

         मेरा प्राण संकट में हैं।                     मेरे प्राण संकट में हैं।

     

    कारक

    1.संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य के अन्य पदों विशेषतः क्रिया के साथ जो सम्बन्ध होता है, उसे कारक कहते है। हिन्दी में आठ कारक हैं। इनके नाम और कारक चिन्ह नीचे व्यक्त किया गया –

         कारक                      कारक चिन्ह

         कर्ता                           ने

         कर्म                           को

         करण                         से, के द्वारा

         सम्प्रदान                      को, के लिए

         अपादान                        से

         सम्बन्ध                       का,की,के

         अधिकरण                      में, पर

         सम्बोधन                      हे, अरे

    जैसे- राम ने रावण को बाण से मारा ।

    राम- कर्ता कारक (ने)

    रावण- कर्म कारक (को)

    बाण- करण कारक (से)

    2.कारकों की पहचान-

              कर्ता- जो क्रिया को सम्पन्न करता है।

              कर्म- जो क्रिया से प्रभावित होता है।

              करण- जो क्रिया का साधन होता है।

              सम्प्रदान- जिसके लिए क्रिया की जाती है।

              अपादान- जो अलगाव को व्यक्त करता है।

              सम्बन्ध- जो दो पदों में सम्बन्ध निरूपित करता है।

              अधिकरण- क्रिया के आधार को अधिकरण कहा जाता है।

              सम्बोधन- पुकारने के लिए सम्बोधन का प्रयोग होता है।

    1.     3.क्रिया पर ‘किसने’ या कौन’ प्रश्न करने से जो उत्तर मिलता है, उसे कर्ता कारक कहते है। जैसे- पवन कालेज में पढ़ता है। कौन पढ़ता है, उत्तर प्राप्त होता है पवन। अतः यह कर्ता कारक है।

    2.  4.   हिन्दी व्याकरण में विभक्तियों को लिखे जाने के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं. मानक हिन्दी में इन विभक्तियों को उसी प्रकार लिखा जाना चाहिए।

    3.   5.  विभक्तियों दो प्रकार की होती हैं- विश्लिष्ट, संश्लिष्ट। संज्ञा के साथ आने वाली विभक्तियों विश्लिष्ट होती हैं अर्थात् शब्द से अलग लिखी जाती हैं। जैसे- पवन ने, कमल ने, गीता ने, वृक्ष पर आप।

    4.     6.सर्वनामों के साथ आने वाली विभक्तियाँ संश्लिष्ट होती हैं, किन्तु यदि विभक्ति चिन्ह दो शब्दों वाला है तो पहला शब्द सर्वनाम के साथ मिलाकर लिखा जाएगा और इसको अलग शब्द सर्वनाम के साथ मिलाकर लिखा जाएगा और इसको अलग लिखा जाएगा। जैसे- तुमने, तुमसे, मुझको, मेरे लिए, उनके लिए, तुझको, तुम्हारे लिए।

    5.    7. कर्ता कारक की विभक्ति शून्य भी है और ‘ने’ भी। अर्थात् कर्ता विभक्ति रहित भी होता है और विभक्ति चिन्ह से युक्त भी होता है। जैसे- राधा गयी, घनश्याम आया,)- ये विभक्ति रहित है। श्याम ने काम किया – इस शब्द में कर्ता की विभक्ति चिन्ह ‘ने’ का प्रयोग हुआ है।

    6.    8. करण कारक और अपादान कारक दोनों का चिन्ह ‘से’ है, किन्तु करण कारक में यह साधन का बोध कराता है, जबकि अपादान कारक में यह अलगाव का बोध कराता है। जैसे- (1) मैं पेन से लिखता हूँ। ( इस वाक्य में पेन ‘लिखना’ क्रिया का साधन है अतः पेन शब्द में ‘करण’ कारक है। (2) मैं गाँव से चला आया। (इस वाक्य में आया ‘से’ के अर्थ में प्रयुक्त होता हुआ है। तो इसमें अपादान कारक है।

    7.   9.  अपादान कारक का प्रयोग निम्न स्थितियों में भी होता है अर्थात् जहाँ तुलना, भिन्नता, आरम्भ, कारण, अलगाव, सीखना, डरना आदि का बोध हो वहाँ अपादान कारक होता है। जैसे-

    गीता सुमन से चतुर है।      (तुलना)

    कमल राकेश से अलग है।    (भिन्नता)

    गंगा हिमालय से निकलती है। (प्रारम्भ)

    मैं गरमी से व्याकुल हूँ।      (कारण)

    पत्ता पेड़ से गिरा।           (अलगाव)

    मैंने आप से सीखा।         (सीखना)

    वह छिपकली से डरती है।         (डरना)

    8.     10.सम्बन्ध कारक को कुछ संस्कृत व्याकरण कारकों में नहीं गिनते क्योंकि इसका क्रिया से कोई सम्बन्ध नहीं होता, अपितु वाक्य के दो शब्दों के सम्बन्ध को इसमें दर्शाया जाता है। हिन्दी में इसे कारकों की श्रेणी में रखा गया है तथा इसके कारक चिन्ह का, की, के हैं जो सर्वनामों के साथ क्रमशः रा,री,रे हो जाते हैं। जैसे-

    मोहन की पुस्तक -        अधिकार सम्बन्ध

    मेरी पत्नी         -        रिश्ता

    पीने का प्याला    -        प्रयोजन सम्बन्ध

    पाँच किलो आलू   -        परिमाण सम्बन्ध

    बीस रूपए का नोट -        मूल्य सम्बन्ध

    सोने की नथनी    -        कार्य-करण सम्बन्ध

    अपवाद- कुछ स्थितियों में ‘का’ चिन्ह का प्रयोग सम्बन्ध कारक के लिए न होकर अन्य कारकों (विशेषतः करण) में भी होता है।

    जैसे- तुलसी के रामचरितमानस में राम आदर्श चरित्र है।

    11.अधिकरण कारक क्रिया के आधार को बताता है

    जैसे- बंदर पेड़ पर बैठा है।

         गीता कुँए में गिर पड़ी।

         वह घर में रहता है।

         वृक्ष पर मोर बैठा था।

         मोहन घर के भीतर घुसा रहता है।

    अशुद्ध वाक्य                                       शुद्ध वाक्य

    मैंने कलकत्ते जाना है।                          मुझे कलकत्ता जाना है।

    तेरे को बोला तो था।                           तुझसे कहा तो था।

    मुझे मेरी माँ से मिलना है।                      मुझे अपनी माँ से मिलना है।

    सीता से जाकर के कह देना।                     सीता से जाकर कह देना।

    इस किताब के अन्दर क्य़ा है?                    इस किताब में क्या हैं?

    मुझे कहा गया है।                             मुझसे कहा गया है।

    मैंने राम को बोल दिया था।                      मैंने राम से कह दिया था।

    लड़का खिलौने को रो रहा था।                    लड़का खिलौने के लिए रो रहा था।

    दो गाड़ियों की टक्कर हो गई।                    दो गाड़यों में टक्कर हो गई।

    फोड़े में दवाई लगा दो।                          फोड़े पर दवाई लगा दो।

    मैं बंटू को नहीं मारा हूँ।                         मैंने बंटू को नहीं मारा है।

    वह राम को लेकर परेशान है।                     वह राम के कारण परेशान है।


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