अर्थव्यवस्था का
अर्थ, प्रकार और क्षेत्र
Meaning, Types and Scope of Economy
- अर्थव्यवस्था एक ऐसा तंत्र है जिसके अन्तर्गत विभिन्न आर्थिक क्रियाओं, संस्थागत क्रियाओं एवं उसके क्रियात्मक संबंधों का अध्ययन किया जाता है। इन आर्थिक क्रियाओं के अन्तर्गत उत्पादन, उपभोग, विनिमय, वितरण, बचत, निवेश सम्मिलित हैं।
- अर्थव्यवस्था के पिता ‘एडम स्मिथ’ है। उनकी अर्थव्यवस्था पर पुस्तक का नाम ‘Wealth of the Nation’ हैं। इसका प्रकाशन 1776 किया गया हैं।
- अर्थव्यवस्थाओं (देशों) द्वारा अपनाई गई उत्पादन प्रणालियों तथा उनमें राज्य या सरकार की भूमिका के आधार पर अर्थव्यवस्थाओं का वर्गीकरण किया गया हैं।–
- खुली अर्थव्यवस्था (Open Economy)- खुली अर्थव्यवस्था एक ऐसी अर्थव्यवस्था है,
जिसमें अन्य राष्ट्रों के साथ वस्तुओं और सेवाओं तथा वहुधा वित्तीय परिसपंतियों का
भी व्यापार किया जाता है। उदाहरण – भारत विश्व के अन्य देशों में उत्पादित वस्तुओं
का उपभोग करते है तथा हमारे उत्पादन का कुछ भाग विदेशों को निर्य़ात किया जाता है।
अतः विदेशी व्यापा भारतीय समस्त माँग को दो प्रकार से प्रभावित करता है। पहला, जब
कोई भारतीय विदेशी वस्तुएँ खरीदता है, तो उसके द्वारा किया गया व्यय समस्त माँग को
कम करते हुए आय के वर्तुल प्रवाह से रिसाव के रूप में निष्कासित होता है। दूसरा,
विदेशों को जो हम निर्यात करते है वह घरेलू उत्पादित वस्तुओं के लिए समस्त माँग
में वृद्धि करते हुए वर्तुल प्रवाह में अंतःक्षेपण के रूप में प्रवेश करता है।
- बन्द अर्थव्यवस्था (Closed Economy)- यह एक ऐसी अर्थव्यवस्था है जो विश्व के साथ किसी प्रकार के विदेशी व्यापार की क्रिया को सम्पन्न नहीं करता है। इस प्रकार की आर्थिक क्रियाएं एक देश की सीमा के अन्दर होती है।
- विकसित अर्थव्यवस्था ( Developed Economy)- इस प्रकार की अर्थव्यवस्था आर्थिक गतिविधियों एवं विकास के एक बेहतर स्तर का प्रतिनिधित्व करती है। इस प्रकार की अर्थव्यवस्था में किसी सीमा या मापदण्ड का निर्धारण करना कठिन है। इस प्रकार की अर्थव्यवस्था के देशों में अमेरिका, जापान, रूस, जैसे देश आते हैं, जिनके नागरिको की प्रतिव्यक्ति आय उच्च और बेहतर जीवन के आधार पर विकसित देश कहा जाता है।
- विकासशील अर्थव्यवस्था ( Developing Eonomy)- इस प्रकार की अर्थव्यवस्था में एसे देश आते हैं जो अपनी पिछड़ी अवस्था से उच्च विकास की ओर प्रयासरत है। जैसे – भारत, पाकिस्तान
- पूँजीवादी अर्थव्यवस्था ( Capitalistic Economy)- इस अर्थव्यवस्था में उत्पादन,आपूर्ति कीमत का निर्धारण बाजार द्वारा किया जाता है। पूँजीवादी अर्थव्यवस्था का उद्गम स्त्रोत एडम स्मिथ की पुस्तक ‘ द वेल्थ ऑफ नेशंस को माना जाता है। इसको ‘बाजार व्यवस्था’ के नाम से भी जाना जाता है।
- समाजवादी अर्थव्यवस्था (Socialist Economy)- इस प्रकार की अर्थव्यवस्था में उत्पादन, आपूर्ति और कीमत का फैसला सरकार द्वारा किया जाता है। जिसके अन्तर्गत उत्पादन के समस्त साधनों पर राज्य का नियंत्रण रहता है। इस प्रकार की अर्थव्यवस्था का पहला सिद्धांत जर्मन दार्शनिक कार्ल मार्क्स (1818-1883) में दिया था।
- मिश्रित अर्थव्यवस्था ( Mixed Economy)- मिश्रित अर्थव्यवस्था में राज्य अर्थव्यवस्था समाजवादी तथा पूँजीवादी अर्थव्यवस्था का मिश्रण होता है। आर्थिक संसाधनों के महत्वपूर्ण भाग पर राज्य का नियंत्रण होता है और उसी के साथ निजी क्षेत्र को विकास का उपयुक्त लाभ प्राप्त होता रहता है। मिश्रित अर्थव्यवस्था में दो बिल्कुल विरोधी विचारधाराओं में समझौते का परिणाम हैं- एक विचारधारा पूँजीवाद का समर्थन करती है और दूसरी इस बात में प्रबल विश्वास रखती है कि समग्र अर्थव्यवस्था के उत्पाद के साधनों का समाजीकरण होना चाहिए। मिश्रित अर्थव्यवस्था को अपनाने वाला प्रथम देश ‘फ्रांस’ था।
- मिश्रित अर्थव्यवस्था एक अनिवार्य और नियोजित अर्थव्यवस्था है भारत मिश्रित अर्थव्यवस्था का सर्वोत्म उदाहरण है। भारत में मिश्रित अर्थव्यवस्था 6 अप्रैल, 1948 को राष्ट्रीय सरकार ने औद्योगिक नीति की घोषणि में मिश्रित अर्थव्यवस्था का सुझाव दिया था ।
- अर्थव्यवस्था के क्षेत्र (Area of Economy)- केंद्रीय सांख्यिकी संगठन द्वारा अपनी राष्ट्रीय आय की पहली श्रृंखला में भारतीय अर्थव्यवस्था को 13 क्षेत्रों में विभाजित किया गया था परंतु केंद्रीय सांख्यिकी संगठन ने अपनी द्वितीय श्रृंखला, जो 1966-67 में जारी की गयी थीं, में भारतीय अर्थव्यवस्था को तीन क्षेत्रों- प्राथमिक, द्वितीयक व तृतीयक क्षेत्रों में विभाजित किया ।
- प्राथमिक क्षेत्र (Primary Sector)- इस क्षेत्र में कृषि, वनक्षेत्र मत्स्य क्षेत्र और खानें आदि प्राकृतिक संसाधन शामिल हैं। इनसे द्वितीयक क्षेत्रक के लिए कच्चा माल मिलता है।
- द्वितीयक क्षेत्र ( Secondary Sector)- इस क्षेत्र में प्राकृतिक उत्पादों को विनिर्माण प्रणाली के जरिए अन्य रूपों में परिवर्तित किया जाता है। जैसे – गन्ने से चीनी और गुड़ का निर्माण। इसे औद्योगिक क्षेत्रक माना जाता है
- तृतीयक क्षेत्र(Tertiary Sector)- इस क्षेत्र में परिवहन, शिक्षा, होटल, भण्डारण और संचार और सामुदायिक एवं व्यक्तिक सेवाएं शामिल की जाती हैं। इसे ‘सेवा क्षेत्रक’ भी कहते है।