सर्वनाम
परिभाषा- संज्ञा के स्थानापन्न शब्द सर्वनाम कहे जाते
हैं। तथा मैं, तुम, वह वे आदि सर्वनाम हैं।
यदि सर्वनाम न होते तो वाक्य में बार-बार संज्ञा का प्रयोग
करना पड़ता। इस पुनरूक्ति से बचने के लिए सर्वनाम की आवश्यकता पड़ती। यदि सर्वनाम
न होते तो वाक्य इस प्रकार के बनाए जाते। जैसे- राम विद्यालय गया। मोहन ने रोटी
खाई। सुरेश सो गया।
सर्वनाम (वह) का प्रयोग करने पर उक्त वाक्य इस प्रकार से
बोले जाएंगे- जैसे-
मोहन घर गया। उसने रोटी खाई और वह सो गया।
सर्वनाम का शाब्दिक अर्थ है-सब का नाम। ये नाम (संज्ञा) के
स्थान पर प्रयुक्त होते हैं। ‘मैं’ ‘तुम’, ‘वह’, सबका नाम है किसी एक व्यक्ति का नहीं। हर व्यक्ति अपने लिए ‘मैं’ का प्रयोग करता है अतः ‘मैं’ सर्वनाम है।
सर्वनाम के भेद –
(1)
पुरूषवाचक सर्वनाम
(2)
निश्चयवाचक सर्वनाम
(3)
अनिश्चयवाचक सर्वनाम
(4)
प्रश्नवाचक सर्वनाम
(5)
सम्बन्धवाचक सर्वनाम
(6)
निजवाचक सर्वनाम
(1) पुरूषवाचक सर्वनाम- पुरूष या स्त्री के नाम के स्थान पर
प्रयुक्त सर्वनाम इस वर्ग में आते हैं। ये तीन प्रकार के होते हैं- (1) उत्तम
पुरूष, (2) मध्यम पुरूष, (3) अन्य पुरूष। मैं, तुम, वह इनके अविकारी रूप हैं। इसके
साथ-साथ इन शब्दों के बहुवचन रूप तथा विभिन्न कारकों में विकारी रूप भी बनते है
जिन्हें आगे दिखाया गया हैः-
पुरूष एकवचन बहुवचन विकारी
रूप
उत्तम पुरूष मैं हम मैंने, मुझको, मुझसे, मुझे,मेरा,
हमें, हमारा, हमसे, हमको
मध्यम पुरूष तू तुम आप, तुम, तूने, तुमने, तुमको, आपने, आपको, आपसे
अन्य पुरूष वह वे इन, उन, इन्हें, उन्हें, उनको
इसे, इससे
(2) निश्चयवाचक सर्वनाम वे सर्वनाम जिनसे किसी निकट या दूर के व्यक्ति या वस्तु का
निश्चयात्मक बोध होता है, निश्चयवाचक सर्वनाम कहे जाते हैं। इन सर्वनामों को दो
उपभेदों में विभक्त किया जा सकता है-
निकटवर्ती - यह, ये
(यह पेन मेरा है।
दूरवर्ती - वह, वे (वह घर कट्टपा का है।)
(3) अनिश्चयवाचक सर्वनाम- वे सर्वनाम जो किसी निश्चि, व्यक्ति या
वस्तु का बोध नहीं कराते अनिश्चयवाचक वर्ग में आते हैं। जैसे- कोई, कुछ। ‘कोई’ का
प्रयोग व्यक्ति के लिए और ‘कुछ’ का प्रयोग ‘वस्तु’ के लिए होता है। जैसे- कोई वहाँ
खड़ा है।, चावल में कुछ पड़ा है।
(4) प्रश्नवाचक सर्वनाम- वे सर्वनाम शब्द जो प्रश्न करने के लिए
प्रयुक्त होते हैं, प्रश्नवाचक सर्वनाम कहे जाते हैं। जैसे – आप क्या कह रहे थे?
पानी में क्या
पड़ा है?
देखो कौन आया है?
(5) सम्बन्धवाचक सर्वनाम- जो, को सम्बन्धवाचक सर्वनाम हैं। इनकी
सहायता से परस्पर सम्बन्ध स्थापित किया जाता है। जैसे- जो बोया है, सो काटोगे।
जो कहा था, सो कर
दिया।
(6) निजवाचक सर्वनाम- स्वयं के लिए प्रयुक्त ‘आप’ शब्द निजवाचक
सर्वनाम है। कभी-कभी खुद का प्रयोग भी इसके लिए होता है।जैसे- मैं खुद लें आऊँगा।
मैं आप कर
लूँगा।
मैं स्वयं चला जाऊँगा।
अशुद्ध वाक्य शुद्ध
वाक्य
मैं मेरा काम कर चुका। मैं अपना काम कर चुका।
वह लोग आ गए। वे लोग आ गए।
सुनिए, मैं तुम्हारा कृतज्ञ हूँ। सुनिए, मैं आपका
कृतज्ञ हूँ।
कोई से मत कहना। किसी से मत कहना।
ये आकाशवाणी है। यह आकाशवाणी है।
ये किसने कहा है? यह किसने कहा है?
तू मेरा पिता है। आप मेरे पिता है।
उन्हें समझ में आ जाएगा। उनकी समझ में आ जाएगा।
घर में उन्हीं के कई बच्चे हैं। घर में उनके कई बच्चे हैं।
वह क्या जानें। वे क्या जानें।
यह लोग क्या कहते हैं? ये लोग क्या कहते हैं?
तुम्हें तुम्हारा काम करना चाहिए। तुम्हें अपना काम करना चाहिए।
हमें हमारा घर वापस दिलवा दीजिए। हमें अपना घर वापस दिलवा दीजिए।
बस, तुम ही मेरा सच्चा मित्र है। बस, तू ही मेरा सच्चा मित्र है।
वह खुद का कार्य करता है। वह अपना कार्य करता है।
चाय में कोई पड़ा है। चाय में कुछ पड़ा है।
मुझे कहा गया था। मुझसे कहा गया था।
विशेषण
परिभाषा – संज्ञा या
सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द को विशेषण कहते हैं। जो शब्द विशेषता बतलाता
है उसे ‘विशेषण’ कहते हैं और जिसकी विशेषता बताई जाती है उसे ‘विशेष्य’
कहते है। जैसे- यह अच्छा लड़का है। (अच्छा- विशेषण) (लड़का- विशेष्य)
विशेषण के प्रकार- विशेषण तीन प्रकार के होते है-
(1) गुणवाचक विशेषण
(2) संख्यावाचक विशेषण
(3) सार्वनामिक विशेषण
(1) गुणवाचक विशेषण- वे विशेषण जो संज्ञा अथवा सर्वनाम के
गुण, धर्म, स्वभाव आदि का बोध करते हैं गुणवाचक विशेषण कहे जाते हैं। जिनको कई
वर्गों में बाँटा गया है-
(क) गुणबोधक – अच्छा, भला, बुरा, सच्चा, झूठा, कपटी, छली, पापी,
पुण्यात्मा, सीधा, सरल, आदि।
(ख)दशाबोधक- मोटा, पतला, युवा, वृद्ध, गीला, सूखा,।
(ग) रंगबोधक – लाल, पीला, नीला, सफेद, हरा, बैंगनी, नारंगी।
(घ) कालबोधक – नया, पुराना, ताजा, बासी, मौसमी, प्राचीन, नवीन।
(ङ) आकारबोधक – गोल, तिकोना, चौकोर, लम्बा, चौड़ा, नुकीला, सुडौल ।
(2) संख्यावाचक विशेषण- जो विशेषण संज्ञा या सर्वनाम की संख्या
का बोध कराते हैं, वे संख्यावाचक विशेषण कहे जाते हैं। जैसे- आठ व्यक्ति, पाँच
गाय, कुछ लोग, सब लड़कियाँ
संख्यावाचक विशेषण को तीन भागों में विभाजित किया गया है-
(क) निश्चित संख्यावाचक
(ख)अनिश्चित संख्यावाचक
(ग) परिमाणबोधक
(क) निश्चित संख्यावाचक – व्यक्ति या वस्तु की निश्चित संख्या का
बोध कराने वाले विशेषण निश्चित संख्यावाचक विशेषण कहे जाते हैं। जैसे- पाँच लड़के,
चार बच्चे, छः कपड़े, दस रूपए, पचास आदमी।
निश्चित संख्यावाचक विशेषणों का निम्न आधार पर बाँटा गया
है-
(अ) गणनावाचक- दो, चार, छह, आठ, नौ, ग्यारह,
तेरह।
(आ)
क्रमवाचक- पहला, चौथा, छठवाँ, नौवा ।
(इ) आवृतिवाचक – दुगना, चौगुना, तिगुना, दस
गुना।
(ई) समुदायवाचक – दोनों, चारों, तीनों,
पाँचों।
(उ) प्रत्येकबोधक – एक-एक, दो-दो, चार-चार,
प्रत्येक।
(ख) अनिश्चित संख्यावाचक – यदि व्यक्ति या वस्तु की संख्या
अनिश्चित हो, तब जो विशेषता प्रयुक्त होते हैं, वे अनिश्चित संख्यावाची विशेषण कहे
जाते हैं। जैसे- कुछ लोग, कई आदमी, सब बच्चे।
(ग) परिमाणबोधक विशेषण- संख्यावाचक विशेषण का एक भेद
परिमाणबोधक भी है। वे विशेषण जो किसी वस्तु की नाप-तौल का बोध कराते हैं, जैसे-
चार किलो घी, दो लीटर दूध, पाँच तोला सोना, थोड़ा पानी,सारा आटा।
परिमाणबोधक विशेषण दो प्रकार के होते है-
निश्चितपरिमाणबोधक- दस मीटर कपड़ा, चार किलो आलू, पाँच किलो प्याज
अनिश्चतपरिमाणबोधक- सब दूध, थोड़ा पानी, पूरा मजा
(3) सार्वनामिक विशेषण- पुरूषवाचक सर्वनाम (मैं, तू, वह) के
अतिरिक्त जब अन्य सर्वनाम किसी संज्ञा से पहले आते हैं तो ‘सार्वनामिक विशेषण’ कहे
जाते हैं। जैसे-
यह पुस्तक मेरी है।, वह घर मोहन का है।, कोई व्यक्ति आ रहा
है।
सार्वनामिक विशेषण के दो भेद हैं-
(क) मौलिक सार्वनामिक विशेषण – ऐसे सर्वनाम जो बिना किसी रूपान्तर के
मूल रूप से संज्ञा से पूर्व आकर उसकी विशेषता बताते हैं, उसे मौलिक सार्वनामिक
विशेषण कहे जाते है। जैसे- यह, वह, कोई
(ख)यौगिक सार्वनामिक विशेषण – जो सर्वनाम रूपान्तरित होकर संज्ञा शब्दों की विशेषता
बताते हैं। वे यौगिक सार्वनामिक विशेषण कहे जाते हैं। जैसे- ऐसा आदमी, कैसा काम,
जैसा देश।
प्रविशेषण
परिभाषा- जो शब्द विशेषण
की विशेषता बतलाते है अर्थात् विशेषणों के विशेषण होते हैं, उन्हें प्रविशेषण कहा
जाता है। जैसे- जूही अति (प्रविशेषण) सुंदर है।
वह बड़ा (प्रविशेषण) साहसी है।
यह सेब बहुत (प्रविशेषण) मीठा है।
विशेषण की तुलनावस्था- विशेषण की तीन अवस्थाएँ तुलनात्मक दृष्टि से हो सकती हैं- मूलावस्था,
उत्तरावस्था एवं उत्तमावस्था। यही तीन अवस्थाएँ है-
मूलावस्था उत्तरावस्था उत्तमावस्था
लघु लघुत्तर लघुत्तम
सुन्दर सुन्दरतर सुन्दरतम
कोमल कोमलतर कोमलतम
महत् महत्तर महत्तम
उच्च उच्चतर उच्चतम
विशेषणार्थक प्रत्यय
प्रत्यय संज्ञा विशेषण
अ निशा नैश
य तालू तालव्य
इक मुख मौखिक
इत हर्ष हर्षित
इल पंक पंकिल
ईला चमक चमकीला
मान बुद्धि बुद्धिमान
आर दूध दुधार
ऐल खपरा खपरैल
आऊ टिक टिकाऊ
आलू झगड़ झगड़ालू
इत कथ कथनीय
ओड़ा भाग भगोड़ा
इयल मर मरियल
अशुद्ध शुद्ध
मैंने वह लड़कों से पूछा। मैंने
उन लड़कों से पूछा।
नीलियाँ साडियाँ बिक रहीं थीं। नीली
साडियाँ बिक रहीं थीं।
पुरानी तराजू कहाँ गई? पुराना
तराजू कहाँ गया?
वहाँ बड़ी सी टकसाल थी। वहाँ
एक बड़ा सा टकसाल था।
कमरे का छत नीचे आ गिरा। कमरे
की छत नीचे आ गिरी।
दसवें रात को वह मर गया। दसवीं
रात को वह मर गया।
मेरे नाक में चोट लगी है। मेरी
नाक में चोट लगी है।
उसने सबों को बुलाया है। उसने
सबको बुलाया है।
वे अनेकों विषयों के ज्ञाता थे। वे
अनेक विषयों के ज्ञाता थे।
लोग इन फूल की माला पहनते हैं। लोग
इन फूलों की माला पहनते है।
