आर्थिक
संवृद्धि और आर्थिक विकास
Economic Growth and Economic Development
आर्थिक संवृद्धि मात्रात्मक परिवर्तन से जुड़ा है।
किसी देश की अर्थव्यवस्था में किसी समयविधि में होने वाली
उत्पादन क्षमता और वास्तविक आय की वृद्धि आर्थिक संवृद्धि कहलाती है। अर्थात् किसी
अर्थव्यवस्था में सकल राष्ट्रीय उत्पाद, सकल घरेलू उत्पाद एवं प्रति व्यक्ति आय
में वृद्धि।
आर्थिक विकास एक व्यक्तिनिष्ठ अवधारणा है। जो गुणात्मक
परिवर्तन से जुड़ा है। अर्थात् इसके अन्तर्गत व्यक्ति के सभी पक्षों के विकास पर
बल दिया जाता है।
परंपरागत विचारधारा में आर्थिक विकास एक ऐसी स्थिति है
जिसमें सकल राष्ट्रीय या घरेलू उत्पाद 5 के 7 प्रतिशत की दर से बढ़ता रहे और उत्पाद
एवं रोजगार सरंचना में इस प्रकार परिवर्तन हो कि उसमें कृषि का हिस्सा कम होते हुए
विनिर्माण क्षेत्र तथा तृतीय क्षेत्र का हिस्सा बढ़ता जाए।
किन्तु आर्थिक विकास का तात्पर्य नए दृष्टिकोण में भौतिक
कल्याण में वृद्धि, गरीबी का निवारण, असमानता और बेरोजगारी का निवारण रखा गया जिसे
पुनर्वितरण के साथ संवृद्धि का नारा दिया गया।
आर्थिक संवृद्धि के साथ आर्थिक विकास की संकल्पना अधिक
व्यापक है। जहाँ आर्थिक संवृद्धि से तात्पर्य किसी देश में प्रति व्यक्ति उत्पादन
से है वहीं आर्थिक विकास से तात्पर्य प्रति व्यक्ति उत्पादन के अलावा सामाजिक और
आर्थिक ढाँचे में परिवर्तन से है।
अक्सर जनंसंख्या के व्यवसायिक वितरण की दृष्टि से राष्ट्रों
को विकसित और अल्पविकसित देशों की श्रेणी में रखा जाता है। प्रायः अल्पविकसित
देशों में राष्ट्रीय आय का बड़ा हिस्सा कृषि तथा अन्य प्राथमिक क्षेत्रों से
उत्पादित होता है।
भारतीय योजना आयोग के अनुसार अल्पविकसित देश वह है जिसमें
एक ओर तो मानव शाक्ति की क्षमता का बहुत कम उपयोग होता है वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक
संसाधनों का भी पूरा प्रयोग नहीं हो पा रहा है।
विकसित देशों की तुलना में अल्प विकसित देशों में मानव
पूँजी भी बहुत कम विकसित हैं। जहाँ संयुक्त राज्य अमेरिका में साक्षरता का स्तर 99
प्रतिशत हैं। वहीं भारत में केवल 74 प्रतिशत लोग साक्षर है।
आर्थिक विकास के कारक (Factors of Economic Development)-
किसी भी देश के आर्थिक विकास में आर्थिक कारकों की अत्यन्त महत्वपूर्ण
भूमिका होती है।
हैराल्ड-डोमर मॉडल में पूँजी को आर्थिक संवृद्धि में
निर्णायक भूमिका दी गई है। अर्थव्यवस्था चाहे जिस प्रकार की हो आर्थिक विकास की
गति तेज रखने के लिए पूँजी निर्माण की दर ऊँची रखनी चाहिए।
अन्य कारकों में, कृषि, विदेशी व्यापार, आर्थिक प्रणाली आदि
है।
आर्थिक विकास की प्रक्रिया में अनार्थिक कारक भी महत्वपूर्ण
है, जिनमें मानव संसाधन शिक्षा, भ्रष्टाचार से मुक्ति, विकास की आकांक्षा है।
अल्पविकसित देशों में यदि गरीबों के दुष्चक्र से छुटकारा पाना है तो उसके लिए ‘प्रबल प्रय़ास’ आवश्यक होगा और निवेश की मात्रा अधिक होनी चाहिए।
मानव विकास सूचकांक (Human Development Report)- मानव विकास सूचकांक,
अर्थशास्त्री महबूब-उल-हक द्वारा विकसित अवधारणा है। यह सूचकांक किसी देश में जीवन
प्रत्याशा, शिक्षा तथा प्रति व्यक्ति आय के आधार पर तैयार किया जाता है जो संबधित देश
में आर्थिक विकास एवं आर्थिक कल्याण को प्रदर्शित करता है।संयुक्त राष्ट्र विकास
कार्यक्रम के अनुसार 1990 से प्रत्येक वर्ष मानव विकास रिर्पोट जारी की जाती है जो
मानव विकास सूचकांक पर आधारित है। एच.डी.आई. (HDI) का आकलन निम्न तीन
आयामों पर आधारित है-
(1)
दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन को ‘जन्म के समय जीवन
प्रत्याशा’ से व्यक्त किया जाता है। इसे स्वास्थ्य का संकेतक भी कहते हैं तथा जीवन
प्रत्याशा सूचकांक के रूप में आकलन करते
है।
(2)
स्कूलिंग के औसत वर्ष, स्कूलिंग के प्रत्याशित
वर्ष इसका आकलन शिक्षा सूचकांक के रूप में किया जाता है।
(3)
जीवन स्तर को प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय
द्वारा व्यक्त किया जाता है। इसका आकलन GNI सूचकांक के रूप में
किया जाता है।
प्रति व्यक्ति आय की गणना सभी देशों के लिए डॉलर
में की जाती है।
Human Development
Report के अनुसार 2009 से HDI के मूल्य के आधार पर देशों को चार समूहों में
वर्गीकृत किया गया है।
(1)
निम्न देश – 0-0.499
(2)
मध्य देश – 0.500-0.799
(3)
उच्च देश – 0.800 – 0.899
(4)
बहुत उच्च देश – 0.900 से ऊपर
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने वर्ष 2019-2020
की मानव विकास रिर्पोर्ट जारी की है। इस सूचकांक में 189 देशों की सूची में भारत
का स्थान 129 वां है।
कुछ महत्वपूर्ण देशों के स्थान-
(1) Norway, (2) Switzerland (3) Ireland (4)
Germany (5) Hong Kong, China
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की मानव विकास
रिर्पोर्ट के आधार पर भारत में भी मानव विकास रिर्पोर्ट जारी किया गया है।
भारत में राज्य स्तरीय मानव विकास रिर्पोर्ट
जारी करने वाला पहला राज्य मध्य प्रदेश है। जिसने पहली मानव विकास रिर्पोर्ट 1995
में प्रस्तुत की।
HDR 2010 में तीन नए माप
रिर्पोर्ट प्रस्तुत किए गए हैं-
मानवीय कल्याण माप
(1)
मानवीय सूचकांक
(2)
लिंग सम्बन्धित विकास सूचकांक
(3)
मानवीय निर्धनता सूचकांक
(1)
असमानता समायोचित मानव विकास सूचकांक (Inequality Adjusted Human Development Index)
(2)
लिंग असमानता सूचकांक (Gender Inequality Index)
(3)
बहु आयामीय निर्धनता सूचकांक (Multi-Dimensional Index)
